मेरा मन भी चिल्लाया,
अब क्या होगा?
सत्ता के मद में शायद,
शाशक भूलेगा लोकधर्म .
लोकतंत्र की हस्ती को मिटाने
शायद इक नई इंदिरा फिर आएगी .
शायद सत्ता गुर्राएगी.
शायद फिर आपात लगेगा.
पर मन में कुछ और चला ......
सत्ता के मद को आँख दिखाने,
क्या राज नारायण फिर आयेंगे ?
सोते जन का मौन तोड़ने ,
शायद सत्ता गुर्राएगी.
शायद फिर आपात लगेगा.
पर मन में कुछ और चला ......
सत्ता के मद को आँख दिखाने,
क्या राज नारायण फिर आयेंगे ?
सोते जन का मौन तोड़ने ,
क्या इक जेपी फिर से जन्मेगा ?
क्या लोकतंत्र की रक्षा को फिर,
जेल भरो आन्दोलन होगा ?
इतिहास स्वयं को दुहराता है .............
सोते जन को नीद जगाने,
सत्ता के मद को आँख दिखाने.
बेदाग़ छवि के अन्ना आये,
तन्द्रा टूटी, चिंता छूटी
फिर लोकतंत्र की रक्षा को,
सारी जनता उमड़ पड़ी .
फिर सत्ता का मद चूर हुआ.
फिर सत्ता का मद चूर हुआ.

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